लखनऊ। डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती से एक दिन पहले अपना दल (कमेरावादी) ने राजधानी लखनऊ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम और “समता संकल्प मार्च” का आयोजन किया। दारुलशफा से अंबेडकर प्रतिमा तक निकाले गए इस मार्च में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए।
मार्च में उठे शिक्षा और आरक्षण के मुद्दे
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने “यूजीसी लागू करो” और “आरक्षण का अधिकार दो” जैसे नारे लगाए। आयोजकों ने इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में निकाला गया मार्च बताया।
पल्लवी पटेल ने सरकार पर साधा निशाना
सिराथू विधायक पल्लवी पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहब ने देश को ऐसा संविधान दिया, जो हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है। उन्होंने कहा कि समाज को संविधान की मूल भावना को याद रखते हुए समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार बाबा साहब के प्रतीकों का सम्मान तो करती है, लेकिन उनके विचारों को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखा रही। उन्होंने कहा कि संविधान की सुरक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता है ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंच सके।
यूजीसी और शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी
पल्लवी पटेल ने कहा कि यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर सर्वोच्च न्यायालय ने विचारपूर्वक फैसला लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में शिक्षा व्यवस्था में ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिनसे वंचित वर्गों को उनका अधिकार मिल सके।
सामाजिक न्याय की विरासत को याद करने की अपील
कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के साथ-साथ सामाजिक न्याय की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले अन्य विचारकों को भी याद किया और समाज में समान अवसर सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम और मार्च को सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के समर्थन में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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