किसान कानूनों को करे रद्द: शिवसेना - NationWatch brings fast, trusted breaking news, current affairs and magazine stories from India.

Latest

Advertise With Us:

Advertise With Us:
NationWatch.in

Breaking News

News Flash 09 अप्रैल 2026 | | दिल्ली में दौड़ी 'तबादला एक्सप्रेस', 20 से ज्यादा IAS का ट्रांसफर 9:43 AM असम में 9 बजे तक 17.87% और केरल में 16.23% वोटिंग, पुडुचेरी में 17.41% मतदान 8:19 AM 'सीमाओं को सुरक्षित करेगा आपका एक वोट', असम के मतदाताओं से अमित शाह की अपील 7:51 AM 'सीजफायर लेबनान के लिए नहीं, ईरान से समझने में हुई है गलती', युद्ध पर बोले जेडी वेंस 7:02 AM पुडुचेरी, केरलम और असम में मतदान शुरू 6:20 AM सीजफायर उल्लंघन के जवाब में हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दागे 5:25 AM केरलम, असम और पुडुचेरी में आज होंगे विधानसभा चुनाव 4:12 AM इजरायली हमलों से लेबनान दहला, 250 की मौत 2:57 AM इजरायली हमलों में 182 की मौत, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी जानकारी 1:57 AM बातचीत से पहले सीजफायर प्रस्ताव की 3 शर्तों का उल्लंघन: ईरान 12:40 AM तीन राज्यों में आज होंगे विधानसभा चुनाव [Nation Watch - Magazine - RNI - Number - UPHIND-48906]

Nation Watch Magazine (PDF)


Thursday, January 14, 2021

किसान कानूनों को करे रद्द: शिवसेना


शिवसेना ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आंदोलनरत किसानों की भावनाओं का सम्मान करने और नए विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा करने से उनका कद और बड़ा हो जाएगा। शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल कर किसानों के प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया। संपादकीय में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र का यह दावा भी चौंकाने वाला है कि किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तानी घुसे हुए हैं। उसमें यह आरोप लगाया गया, "यदि खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ की है, तो यह सरकार की ही विफलता है। सरकार विरोध को समाप्त नहीं करना चाहती है और आंदोलन को देशद्रोह का रंग देकर राजनीति करना चाहती है।"

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अगले आदेश तक नए कृषि कानूनों के लागू करने पर रोक लगा दी और दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदार्शन कर रहे किसानों की यूनियनों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध को हल करने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला किया। संपादकीय में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद इस मुद्दे पर गतिरोध जारी है। किसान यूनियनों ने समिति के चार सदस्यों से बात करने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने पहले कथित रूप से कृषि कानूनों का समर्थन किया था। 'सामना' में कहा गया, "प्रधानमंत्री मोदी को किसानों के विरोध और साहस का स्वागत करना चाहिए। उन्हें किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानूनों को खत्म कर देना चाहिए। मोदी का आज जितना बड़ा कद है, ऐसा करने से उनका कद और बड़ा हो जाएगा।"

26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की निर्धारित ट्रैक्टर रैली का जिक्र करते हुए संपादकीय में कहा गया कि अगर सरकार चाहती है कि स्थिति और न बिगड़े, तो किसानों की भावनाओं को समझने की जरूरत है। उसमें कहा गया कि इस प्रदर्शन में अब तक 60 से 65 किसानों की जान जा चुकी है और देश ने आजादी के बाद अब तक ऐसा अनुशासित आंदोलन नहीं देखा है।

No comments:

Post a Comment

If you have any type of news you can contact us.

Prime Minister Narendra Modi at the National Creators' Awards, New Delhi

NATION WATCH -->