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Tuesday, December 29, 2020

पाकिस्तान में हिंदू-ईसाई लड़कियों पर लॉकडाउन में बढ़े अत्याचार



नेहा को चर्च में बजने वाले भजन बेहद पसंद थे। लेकिन पिछले साल इन्हें गाने का अवसर उससे छीन लिया गया,जब महज 14 साल की उम्र में पहले जबरन उसका धर्म ईसाई से बदलकर इस्लाम कर दिया गया और उससे दोगुने उम्र के बच्चों के पिता 45 वर्षीय शख्स से निकाह करा दिया गया। वह इतनी मंद आवाज में अपनी कहानी कहती है कि कई बार शब्द सुनाई नहीं देते। नेहा का पति कम उम्र की लड़की से शादी और रेप के आरोपों की वजह से जेल में है। लेकिन उसके भाई के पास से कोर्ट में पिस्टल बरामद होने के बाद से नेहा काफी डरी हुई और छिपकर रह रही है। 

नेहा ने कहा, ''वह मुझे गोली मारने के लिए गन लाया था। सुरक्षा की दृष्टि से नेहा के सरनेम का यहां जिक्र नहीं किया जा रहा है। नेहा उन 1000 धार्मिक अल्पसंख्यकों में शामिल है, जिन्हें हर साल पाकिस्तान में इस्लाम ग्रहण करने पर मजबूर कर दिया जाता है। अधिकतर मामलों में ऐसा कम उम्र की लड़कियों से मर्जी के खिलाफ निकाह के लिए किया जाता है। 

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान इस तरह के अपराधों में तेजी आ गई है, क्योंकि लड़कियां स्कूल से बाहर और लोगों की नजरों में हैं। लड़कियों की तस्करी करने वाले इंटरनेट पर अधिक एक्टिव हैं और गरीब परिवार कर्ज में डूब चुके हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस महीने पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंता वाले देशों की श्रेणी में रखा है। हालांकि, पाकिस्तान ने इसे खारिज किया है। 

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी कमीशन ने कहा था कि कम उम्र की अल्पसंख्यक हिंदू, ईसाई, सिख लड़कियों का अपहरण किया जाता है, उन्हें इस्लाम कबूल कराया जाता है और फिर जबरन निकाह के बाद रेप किया जाता है। धर्मांतरण की शिकार हुईं अधिकतर लड़कियां सिंध प्रांत में गरीब हिंदू परिवारों से हैं। हाल के महीनों में नेहा सहित दो ईसाई लड़कियों के केस ने देश को हिला दिया है। 

आमतौर पर लड़कियों का अपहरण दुल्हन तलाश कर रहे लोगों और उनके रिश्तेदारों के द्वारा किया जाता है। कभी-कभी जमींदार लोग बकाया कर्ज के भुगतान के रूप में अल्पसंख्यकों की बेटियों को छीन लेते हैं और पुलिस आंखें मूंद लेती है। पाकिस्तान में स्वतंत्र मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, धर्मांतरण के बाद लड़कियों का विवाह उनसे अधिक उम्र के लोगों से करा दिया जाता है।  

बाल संरक्षण कार्यकर्ता कहते हैं कि जबरन धर्मांतरण के मामलों को पैसों के बल पर अंजाम दिया जाता है, जिनमें इस्लामिक मौलवी, निकाह को वैधता देने वाले मजिस्ट्रेट और भ्रष्ट पुलिस वाले शामिल होते हैं। एक कार्यकर्ता जिब्रान नासिर इस नेटवर्क को माफिया बताते हुए कहते हैं कि गैर-इस्लामिक लड़कियां इनकी शिकार बनती हैं। 

पाकिस्तान की 22 करोड़ आबादी में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी महज 3.6 फीसदी है और ये अक्सर भेदभाव का शिकार होते हैं। जो लोग जबरन धर्मांतरण के खिलाफ शिकायत करते हैं उन्हें ईशनिंदा के आरोपों के साथ निशाना बनाया जा सकता है। दक्षिणी सिंध प्रांत में 13 साल की हिंदू लड़की सोनिया कुमारी का अपहरण कर लिया गया। अगले दिन पुलिस ने उसके परिवार को बताया कि उसने इस्लाम कबूल कर लिया है। उसकी मां ने इंटरनेट पर एक वीडियो के जरिए अपील की, 'भगवान के लिए, कुरान या जिसमें भी तुम्हारा विश्वास है, मेरी बेटी को लौटा दो।' एक हिंदू कार्यकर्ता ने नाम गोपनीय रखने की अपील करते हुए बताया कि उसके परिवार को दबाव में यह लिखना पड़ा कि उनकी 13 साल की बेटी ने अपनी मर्जी से धर्म बदला और 36 साल की उम्र और 2 बच्चों के पिता से शादी की।

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