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Thursday, November 4, 2021

सिद्धार्थनगर - महिलाओं के लिए अनुकरणीय है मइया सीता का चरित्र- आलोकानंद




डुमरियागंज क्षेत्र के बिथरिया स्थित काली माता मंदिर पर चल रहे श्री लक्ष्मी पूजा समारोह के दौरान श्रीराम कथा का हुआ आयोजन



डुमरियागंज।


डुमरियागंज क्षेत्र के बिथरिया स्थित काली माता मंदिर पर चल रहे श्री लक्ष्मी पूजा समारोह के दौरान शुक्रवार की रात श्रीराम कथा का भी आयोजन हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन वृंदावन से पधारे कथावाचक आलोकानंद शास्त्री ने माता सीता के चरित्र का वर्णन किया। साथ ही महिलाओं के लिए मैया सीता का चरित्र अनुकरणीय बताया।




शास्त्री ने  कहा कि माता सीता का चरित्र भारतीय नारियों के लिए अनुकरणीय है। स्वयंवर से लेकर वनवास और उसके बाद मां धरती में विलीन होना ये सभी महिला के साथ-साथ समाज को भी परिवार और संस्कार तथा धर्मरूपी बंधन में बांधता है। उन्होंने राम के वनवास पर विस्तार से प्रकाश डाला। कैकेयी की शर्त पर राम का वनवास होना और सीता का उस मुश्किल घड़ी में पति के साथ जाना उनके प्रतिव्रता धर्म का परिचायक है। वहीं अनुज लक्ष्मण द्वारा राम का साथ नहीं छोड़ना भाईयों के लिए भी यह एक संदेश है। यदि इसका आत्मसात करें तो निश्चित रूप से परिवार और समाज को टूटने से बचाया जा सकता है। व्यास ने केवट प्रसंग पर चर्चा करते हुए उसे भगवान का भक्त बताया और कहा कि एक केवट ही नटखट भक्त था।  जिसकी वार्ता ने भगवान को भी हंसने पर विवश कर दिया। कथावाचक ने कहा कि यदि श्रीराम का वनवास नहीं होता तो शायद आज आदर्श पुरूष के रूप में इतनी बड़ी ख्याति नहीं मिलती। वंदना और मंगलाचरण से प्रारंभ हुए रामकथा के भक्तिरस में श्रोता घंटों डुबकी लगाते रहे । आरती एवं भजन-की‌र्त्तन के साथ हुआ समापन। इस दौरान मनीष अग्रहरि, राम सिंह यादव, गुड्डू अग्रहरि आदि मौजूद रहे।


वृंदावन से आए कथावाचक आलोकानंद शास्त्री ने दूसरे दिन के माता सीता के चरित्र का किया वर्णन

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