इस बार पूरे भारत में दिखाई देगा चंद्रग्रहण ग्रहण का आरंभ रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले लगता है। - NATION WATCH - बदलते भारत की आवाज़ (MAGZINE)

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Thursday, July 26, 2018

इस बार पूरे भारत में दिखाई देगा चंद्रग्रहण ग्रहण का आरंभ रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले लगता है।

आज की सत्ता प्रदेश ब्यूरों : कल 27 जुलाई 2018 दिन शुक्रवार को लगने वाला चंद्रग्रहण मध्य रात्रि में 11 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगा।और चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक प्रारंभ होगा सूतक दौरान कई कार्यों को करने से मना किया जाता है।

इस बार ग्रहण की खासियत यह है कि यह ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा चंद्रग्रहण का आरंभ रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले लगता है जबकि सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लगता है। इस नियम के अनुसार, 27 जुलाई की मध्यरात्रि को पड़ने वाले चंद्रग्रहण का सूतक 27 जुलाई की दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से लग जाएगा। जो भी धार्मिक कार्य करने हों उन्हें सूतक काल लगने से पहले पूर्ण किया जा सकता है।

इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। यह एक  संयोग माना जा रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2000 में ऐसा संयोग बना था। इस अवसर पर स्नान और दान-पुण्य का लाभ सामान्य दिनों से कई गुना अधिक प्राप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के मौके पर दान करने के लिए सबसे उत्तम समय वह माना गया है, जब ग्रहण का मोक्ष काल समाप्त हो जाता है। यानी ग्रहण समाप्त होने के बाद दान करना चाहिए। इस नियम के अनुसार, 27 जुलाई 2018 की रात को पड़ने वाले ग्रहण का समाप्ति काल 28 तारीख की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर है। ऐसे में सुबह स्नान के बाद ग्रहण का दान देना अति शुभ फलदायी होगा।

ग्रहण का स्पर्श कालः रात 11 बजकर 54 मिनट खग्रास आरंभः रात 12 बजे ग्रहण मध्यः 1 बजकर 52 मिनट खग्रास समाप्तः 2 बजकर 43 मिनट ग्रहण मोक्षः 3 बजकर 49 मिनट


चंद्रग्रहण मकर राशि में लग रहा है। ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए चंद्रमा के मंत्र- ॐ सोम सोमाय नमः का जितना हो सके जप करें। महामृत्युंजय मंत्र और अपने ईष्टदेवता एवं राशि का मंत्र जपना भी शुभ रहेगा। मकर राशि के देवता शनिदेव हैं इसलिए शनि के मंत्र ‘ओम प्रां प्रीं प्रों स: शनिश्चराय नम:’ का जप भी कर सकते हैं।

देवेन्द्र प्रताप सिंह कुशवाहा

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